संता रात को टूर से घर लौटा। सुबह उसने अपनी नवविवाहिता पत्नी से पूछाः डार्लिंग, तुम्हे नींद में बडबडाने की आदत है क्या? रात में मैंने सुना, तुम कह रही थीं- ’गुड नाइट जानू, आई लव यू...मम्म्म्म्म।‘ संतानीः मुझे नींद में बडबडाने की कोई आइत नहीं हैं। लेकिन मुझे लगता है कि तुम्हें नींद में सुनने की गंदी आदत है। मैं तो अपने मोबाइल पर बात कर रही थी।
संता (पेपर पढते हुए जोश में आकर)ः अगर मेरे हाथ में सरकार की बागडोर हो, तो मैं देश की तकदीर बदल दूंगा। बंतानी (पत्नि)ः तुम पहले पैजामा तो बदल लो, सुबह से उल्टा पहन रखा है।
एक बार संता पर शुद्ध हिंदी बोलने की धुन सवार हो गई। मैकेनिक की दुकान पर उसने स्कूटर पर चढे-चढे कहाः महाशय, मेरी घ्द्विचक्रवाहिनी के पश्च चक्र में वायु तनिक न्युन हो गई है। कृपया अपने वायुपूरक यंत्र से वायु की पूर्ति कीजीए। मैकेनिकः साहब, हिंदी में बोलो न। संताः अबे पिछले पहिए में हवा डाल।
संताः मां, इस बार हम सारे पटाखे इसी दुकान से खरीदेंगे। बंतानीः पर बेटा, यह तो गर्ल्स हॉस्टल है। संताः तो फिर भैया क्यों कहते हैं कि सारी फुलझडयां यहीं मिलती हैं।